Ummeed

हर कोशिश नाकाम लगती है
इंसान इस कदर हार चुका है
हर आरज़ू भी नाराज़ लगती है
अब जो इंसान थक चुका है
हर पल बेचैन और हर धड़कन तेज़
अंधेरा गहरा भी हो तो ख़ौफ़ नहीं
जब दिन के उजाले में उम्मीदें ही
सहमे पैरों से चलती है